हमारे बारे में

जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक मर्यादित, रीवा की स्थापना 21/07/1949 में की गई थी[cite: 6]। रीवा शहर, जो विंध्याचल पर्वतमाला पर फैले विंध्य क्षेत्र के मध्य भाग में स्थित है, मधुर संगीत के जादूगर और बादशाह अकबर के नवरत्नों में से एक – तानसेन और बीरबल जैसे महान विभूतियों की जन्मस्थली रहा है[cite: 6]। कलाकर और बिछिया नदियों के किनारे बसा रीवा शहर, बघेल राजवंश के शासकों की राजधानी होने के साथ-साथ विंध्य प्रदेश की भी राजधानी रहा है[cite: 6]। ऐतिहासिक क्षेत्र रीवा को दुनिया भर में 'सफेद शेरों की धरती' के रूप में जाना जाता है[cite: 6]।

बैंक का मुख्य उद्देश्य: बैंक द्वारा रीवा जिले के कृषकों को मुख्य रूप से अल्पावधि कृषि ऋण, मध्यावधि ऋण एवं दीर्घकालीन ऋण उपलब्ध कराए जाते हैं, जिससे किसानों को कृषि संबंधी आवश्यकताओं की पूर्ति हो सके[cite: 6]।

उत्पाद एवं डिजिटल सेवाएँ: बैंक द्वारा वित्तीय वर्ष में व्यापक स्तर पर अल्पकालीन ऋण वितरण किया गया है[cite: 6]। इसके अतिरिक्त बैंक द्वारा आधुनिक बैंकिंग सेवाएँ जैसे RTGS / NEFT, लॉकर सुविधा, एवं Bharat Aadhaar Seeding Enabler (BASE) जैसी डिजिटल सेवाएँ प्रदान की जा रही हैं[cite: 6]।

हमारा नेटवर्क: बैंक का नेटवर्क रीवा जिले में विस्तृत रूप से फैला हुआ है, जिसमें 21 शाखाएँ एवं 148 सहकारी संस्थाएँ सम्मिलित हैं[cite: 6]। इन्हीं के माध्यम से अमानत संग्रहण एवं ऋण वितरण की समस्त गतिविधियाँ संचालित की जाती हैं[cite: 6]।

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